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ॐ आयुद्रोणसुते श्रीयँ दशरथे शत्रुक्षयँ राघवे ऐश्वर्यँ नहुषे गतिश्च पवने मानँ च दुर्योधने | दानँ सूर्यसुते बलँ हलधरे सत्यँ च कुन्तीसुते विज्ञानँ विदुरे भवन्तु भवताँ कीर्तिश्च नारायणे |

ॐ आयुद्रोणसुते श्रीयँ दशरथे शत्रुक्षयँ राघवे
ऐश्वर्यँ नहुषे गतिश्च पवने मानँ च दुर्योधने |
दानँ सूर्यसुते बलँ हलधरे सत्यँ च कुन्तीसुते
विज्ञानँ विदुरे भवन्तु भवताँ कीर्तिश्च नारायणे ||

अश्वत्थामाको समान लामो आयु , राजा दशरथका समान ख्याती , राम चन्द्रका समान शत्रुलाई परास्त गर्ने क्षमता , राजा नहुषका समान ऐश्वर्य , वायुको समान वेग , दुर्योधनका समान मान-सम्मान , सूर्य पुत्र कर्णका समान दानी ,बलरामका समान बलशाली , कुन्ती पुत्र युधिष्ठिरका समान सत्य वादी , विदुरका समान नीतिज्ञ र भगवान नारायणका समान कीर्तिशाली बन्नसकियोस् ||

भद्रमस्ति शिवँ चास्तु महालक्ष्मी प्रसीदतु |
रक्षतु त्वाँ सदा देवा आशिष: सन्तु सर्वदा ||

कल्याण होस्, महालक्ष्मी प्रसन्न हुनुहोस्, देवताहरुले सधै रक्षा गरिरहुन् , सधै महापुरुषहरुको आशीर्वाद लागिरहोस् |

जयन्ति मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी |
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोsस्तुते ||

जयन्ति , मङ्गला , काली ,भद्रकाली ,कपालिनी ,दुर्गा ,क्षमा , शिवा , धात्री , स्वाहा , स्वधा , नामले प्रसिद्ध तिमिलाई नमस्कार छ |

जय त्वॅँ देवी चामुन्डे जय भूतार्तिहारिणी |
जय सर्वगते देवी कालरात्री नमोsस्तुते ||

देवी, चामुन्डे! तिम्रो जय होस्, सम्पूर्ण प्राणीको दु:ख हरण गर्ने जगदम्बे ! तिम्रो जय होस्, सबमा व्यापक रहनेवाली देवी ! तीम्रो जय होस् | हे कालरात्री ! तिमिलाई नमस्कार छ |

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके | शरण्येत्र्यम्बके गौरि नारायणी नमोsस्तुते ||

सब मङ्गलमा माङ्गल्यरुप,कल्याण स्वरुपिणी सर्वार्थ सिद्ध गर्ने शरणागतलाई शरण लिने, तीन नेत्रवाली हे गौरी, नारायणी ! तिमीलाई नमस्कार छ |

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