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शुभ प्रभात | हेरौं , वेदका ऋचाका अंशहरु जसले मानव जातिलाई सत्कर्म गर्न संधै प्रेरित गरी रहेछन |

प्रवीण अधिकारी——–

शुभ प्रभात | हेरौं , वेदका ऋचाका अंशहरु जसले मानव जातिलाई सत्कर्म गर्न संधै प्रेरित गरी रहेछन |

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ऋग्वेद : मनुर्भ‌व – मान्छे बन |
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(१) एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति | (१ |१६४ ४६ ) एउटा ईश्वरलाई विद्वानहरु अनेकौं नाउँले चिह्नाउन छन् |
(२) स्वस्ति पन्थामनुचरेम | (५|५१|१५) कल्याण मार्ग अनुसरण गर |
(३) विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव | यद् भद्रं तन्न आसुव | (५|८५|५) विश्वदेव सविताले हाम्रा दुर्गुणहरु हटाउन , जो कल्याणकारी छन् ति मात्र दिउन |
(४) उप सर्प मातरं भूमिम् | (१०|१८|१०) मातृभूमिको सेवा गर |
(५) सं गच्छध्वम् सं वदध्वम् | (१०|१८१|२) हामी सबै संगै हिडम , सबै एकनासले बोलम |

यजुर्वेद : सुमना भव – असल मनका होउ |
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(६) ऋतस्य पथा प्रेत | (७|४५) धर्मको बाटोमा हिंडौ |
(७) भद्रं कर्णेभिः श्रृणुयाम | (२५|११) असल कुरो हाम्रा कानले सुनोस |
(८) तन्मे मनः शिव संकल्पमस्तु | (३४|१) हाम्रो मन शुभ भई सबैको कल्याणार्थ सोच्ने होओस |
(९) मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे | (३६|१८) मित्रताको दृष्‍टिले सर्वत्र हेरौं |
(१०) मा गृधा कस्य स्विद धनम् | (४०|१) अरुको सम्पतिमा लोभ लालच नगर |

सामवेद : सरस्वन्तम् हवामहे – परमेश्‍वरको आह्वान गरौँ !
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(११) अध्व‌रे सत्य धर्माणं कविम् अग्निम् उपस्तुहि | (३२) यज्ञमा सत्य धारमा रत कवि अग्निको स्तुति गरौँ |
(१२) ऋचा वरेण्यम् अवः यामि | (४८) वेद मंत्रले सबैको सुरक्षा गरोस |
(१३) मंत्र श्रुत्यं चरामसि | (१७६) श्रुतिको हामी सबैले पालना गरौँ |
(१४) जीवा ज्योति रशीमहि | (२५९) सबै जीव जन्तुले ज्ञान प्रकाश प्राप्त गर्न सकुन |
(१५) यज्ञस्य ज्योतिः प्रियं मधु पवते | (१५) यज्ञको ज्योतिले सबैमा प्रिय र मधुर भावना जगाउन सकोस |
अथर्ववेद : मानवो मानवम् पातु – मान्छेले मान्छेको पोषण गरुन |
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(१६) माता भूमिः पुत्रोस्हम् पृथिव्याः | हाम्री माता भूमि हुन , हामी पृथ्वीका सन्तान हौँ |
(१७) यज्ञो विश्‍वस्य भुवनस्य नाभिः | (९|१०|१४) परोपकारी यज्ञ यस विश्‍व -भुवनको केन्द्रमा रहेको छ |
(१८) ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत | (११|५|१९ ) ब्रह्मचर्यको तपस्याले देउताहरुले मृत्युमा विजय अर्थात अमरतत्व योग प्राप्त गरेका थिए |
(१९) मधुमतीं वाचमुदेयम | (१६|२|२) म सधैं मीठो वाणी बोल्न सकुँ |
(२०) सर्वमेव शमस्तु नः | (१९|९|१४) हामी सबै शान्ति पूर्वक रहन सकौं |

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